बांग्लादेश में ‘कपड़ा क्रांति’: गारमेंट उद्योग के मजदूरों का उग्र प्रदर्शन, ढाका सहित कई इलाकों में हालात बेकाबू
बढ़ती महंगाई और वेतन वृद्धि की मांग को लेकर बांग्लादेश का गारमेंट (कपड़ा) उद्योग ठप हो गया है। राजधानी ढाका और आसपास के औद्योगिक इलाकों में हिंसक प्रदर्शनों के बाद 500 से अधिक फैक्ट्रियां बंद कर दी गई हैं। दावा किया जा रहा है कि सत्ता परिवर्तन के बाद से देश का सबसे प्रमुख उद्योग भारी आर्थिक गिरावट का सामना कर रहा है।
ढाका (अंतरराष्ट्रीय डेस्क):पड़ोसी देश बांग्लादेश इस समय एक बड़े आर्थिक और औद्योगिक संकट से गुजर रहा है। देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले ‘रेडीमेड गारमेंट’ (कपड़ा) उद्योग में भूचाल आ गया है। वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर लाखों कपड़ा मजदूर सड़कों पर उतर आए हैं। राजधानी ढाका, सावर, आशुलिया और नारायणगंज जैसे प्रमुख औद्योगिक हब में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़पों के कारण पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
क्या है मजदूरों की मुख्य मांग?प्रदर्शनकारी मजदूरों की सबसे बड़ी शिकायत बढ़ती महंगाई और जीवन यापन के बढ़ते खर्च से जुड़ी है। उनका कहना है कि दूध, अंडे, गैस और बिजली के दाम आसमान छू रहे हैं, लेकिन उनकी पगार वहीं की वहीं है। वर्तमान में उनका न्यूनतम मासिक वेतन काफी कम है, और वे इसे बढ़ाकर कम से कम 30,000 टका (लगभग 243 अमेरिकी डॉलर) करने की मांग कर रहे हैं। मजदूरों का साफ कहना है कि, “हम अर्थव्यवस्था का पहिया चलाते हैं, लेकिन हमारे बच्चों को भूखे पेट सोना पड़ रहा है।”
सत्ता परिवर्तन और उद्योग में गिरावट का दावाराजनीतिक और आर्थिक जानकारों का दावा है कि बांग्लादेश में हाल ही में हुए सत्ता परिवर्तन और राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर इस उद्योग पर पड़ा है। देश के कुल निर्यात में करीब 80 से 85 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला यह कपड़ा उद्योग इस समय भारी गिरावट से जूझ रहा है। वैश्विक ब्रांडों (जैसे लेवी स्ट्रॉस, टिम्बरलैंड आदि) के ऑर्डर प्रभावित हो रहे हैं। फैक्ट्रियों में उत्पादन ठप होने से निर्यात संकट गहरा गया है, जिससे मालिकों और मजदूरों दोनों के बीच हताशा बढ़ रही है।
500 से अधिक फैक्ट्रियां बंद, सड़कों पर उग्र प्रदर्शनढाका और अन्य शहरों से सामने आ रही तस्वीरें और वीडियो स्थिति की गंभीरता को बयां कर रहे हैं। प्रदर्शनों के उग्र होने, सड़कों पर आगजनी और फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद सुरक्षा की दृष्टि से लगभग 500 से अधिक गारमेंट फैक्ट्रियों को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले और रबर बुलेट का इस्तेमाल करना पड़ा है।
सरकार का रुख और आगे का रास्ताबढ़ते बवाल को देखते हुए बांग्लादेश सरकार ने वेतन समीक्षा के लिए एक ‘वेतन बोर्ड’ (Wage Board) का गठन किया है। हालांकि, मजदूरों का कहना है कि यह कदम बहुत देरी से उठाया गया है और जब तक उनकी मांगें लिखित में पूरी नहीं होतीं, उनका आंदोलन जारी रहेगा। गृह मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि श्रम आंदोलन की आड़ में हिंसा करने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा।
फिलहाल, बांग्लादेश का यह संकट न केवल उसकी घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए बल्कि वैश्विक कपड़ा आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) के लिए भी एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है। अगर जल्द ही कोई स्थायी समाधान नहीं निकला, तो यह संकट देश को एक बड़ी आर्थिक मंदी की ओर धकेल सकता है।












